श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ मईलापुर में विराजित जिनशासन चंद्रिका दक्षिण दीपिका साध्वी डॉ. प्रतिभा श्री ने धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो इस संसार में पामर प्राणी हैं उनका जीना भी जगना अच्छा नहीं हैं वह जीव पाप ही करता रहेंगा। कुछ जीव का जागते रहना ही अच्छा वह जीव है धर्मात्मा। वह जीव धर्म-आराधना साधना करता रहेंगा। जो धर्म साधना करेंगे तीन तरह के व्यक्ति होते हैं:- उत्तमपुरुष:जो व्यक्ति स्वयं से पाप नहीं करता पाप अपने जीवन चलाने के लिए पाप हो जाता है ② मध्यम पुरुषः जो व्यक्ति परलोक की भय के कारण वह व्यक्ति पाप नहीं करता है। ③ सामान्य पुरुष: जो राजा के दण्ड के कारण पाप नहीं करता है।। हमें पाप से घृणा करनी चाहिए पापी से घृणा नहीं करना चाहिए। हिए। हमारें जैनिजम दो प्रकार के कर्म बताया गया है ① निध्दत कर्म ② निकाचित कर्म। हमें निकाचित कर्मो का बंध नहीं करना चाहिए क्योंकि निकाचित कर्मो का प्रगाढ रूप से बन्ध होता है। जैसे खंदक ऋषि ने काचरें छाल उतारी गयी। हमें छोटी-छोटी बातों में कर्म का बन्धन नहीं करने चाहिए। चार प्रकार की जेल बताई गई है,जीव संसार में जन्म लेता है तब भी रोता है और अन्तिम समय में भी रोता हैं उसकी आँखों में आँसू आता है। हमें चितन करना चाहिए हमें पाप से कर्मो का बंध होता है। साध्वी ऋषिता श्री ने प्रवचन में फरमाया हमें उपकारीयों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना माता, पिता, गुरु के प्रति समर्पण के भाव रखना चाहिए । उपकार के प्रति अपकार के भाव नहीं रखने चाहिए। तो हमारी लाइफ गुड बनानी है। आज के जाप के लाभार्थी:- मदनलाल अशोक खाबिया के वहा हुआ। कल के जाप के लाभार्थीः- गौतमचंद, हितेन्द्रकुमार योगेन्द्र सुराणा के वहा रहेगा। साध्वी प्रियांगी श्री ने सूचना दी। सुरत और चेन्नई उपनगर के अतिथीगण धर्म सभा में उपस्थित रहे प्रवचन का लाभ लिया,तपस्या निरंतर गतिमान चल रही है। रुक्मणी कांकलिया के आज 18 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। धर्म सभा का संचालन मईलापुर संघ के मंत्री विमलचंद खाबिया ने किया
