राज्य में टीबी की दवाइयों की कमी के कारण, टीबी एलिमिनेशन कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है. पुणे मनपा ने फरवरी में टीबी के मरीजों के लिए 40 लाख रुपए की दवाएं खरीदी थीं, हालांकि अब पुणे सहित पूरे राज्य में टीबी की दवाइयों की कमी की खबर हैं.
राज्य के अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं की खरीद में 3 महीने की देरी हो सकती है. जबकि मनपा के पास सिर्फ 1 महीने का ही टीबी की दवाइयों का स्टॉक बचा है. मनपा में नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम (एनटीईपी) के तहत 4,553 टीबी मरीज रजिस्टर्ड हैं, जिन्हें 6 महीने के लिए दवाएं उपलब्ध कराई जानी हैं.
हालांकि, आचार संहिता के कारण बड़ी मात्रा में टीबी दवाओं की खरीद संभव नहीं है. मनपा के सिटी टीबी अधिकारी डॉ. प्रशांत बोठे ने कहा कि दवाओं की कमी का आभास होने के कारण हमने टीबी के लिए पहले ही दवाएं खरीद ली थीं. वहीं 3 फिक्स्ड डोस कॉम्बिनेशन (एफडीसी) और 4 फिक्स्ड डोस कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं का कोई स्टॉक नहीं खरीदा गया था. दवाओं की खरीदी फरवरी में की गई थी और अब राज्य ने 18 मार्च को एक पत्र जारी कर सूचना दी है कि स्थानीय स्तर पर टीबी की दवा की व्यवस्था की जाए क्योंकि दवाओं की आपूर्ति में 3 महीने की देरी हो सकती है. राज्य भर में टीबी की दवाइयों की कमी है और जिले के अन्य हिस्सों से टीबी के मरीज अब दवाओं की तलाश में पुणे शहर में टीबी यूनिट्स में आना-जाना कर रहे हैं.
हमारी दवाओं का स्टॉक एक महीने से भी कम समय में ख़त्म हो जाएगा. इसके साथ टीबी कार्यक्रम के लिए आवंटित बजट भी समाप्त हो गया है और दवाओं की खरीदी 2 लाख से अधिक रुपयों में नहीं की जा सकती है. राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सेंट्रल टीबी डिवीजन (सीटीडी) ने राज्य टीबी अधिकारियों ने लिखे अपने पत्र में कहा है कि दवाओं की खरीद में अप्रत्याशित और बाहरी परिस्थितियों के कारण तीन महीने की देरी हो सकती है. हमने स्थानीय निकायों से कहा है कि जिनके पास दवाओं का स्टॉक नहीं है, वे मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए कहें. राज्य में आवश्यक टीबी रोधी दवाओं की खरीद की प्रक्रिया चल रही है और टेंडर जारी किया गया हैं
दिनेश परमार
पुणे जिला महाराष्ट्र
