किशन माली/पिण्डवाड़ा। मोदी सरकार से लेकर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन तक, हर कोई पर्यावरण संरक्षण के नाम पर रोजाना नए-नए कार्यक्रमों का आयोजन कर जनता को जागरूक करने का दावा कर रहा है। एक ओर ”एक पेड़ माँ के नाम जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर पिण्डवाडा में उन्हीं जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा हरे-भरे पेड़ों की हत्या करवाई जा रही है।जानकारी के अनुसार सार्वजनिक स्वतंत्र दिवस कार्यक्रम को लेकर समारोह स्थल के समीप मैदान में दशक से भी पुराने हरे भरे नीम एवं अशोक का पेड सहित अन्य पेडों पर कुल्हाडी चलाने का मामला सामने आया है।आश्चर्यजनक रूप से नगर पालिका ने नरेगा कर्मियों से हरे-भरे पेड़ को कटवा दिया और इसे हटाने के लिए नगर पालिका की कचरा गाड़ी का इस्तेमाल किया गया। हैरानी की बात है कि कटे हुए पेड़ का जमीनी हिस्सा आज भी अपनी व्यथा कह रहा है, लेकिन कोई अधिकारी इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।इस मामले को लेकर आमजन के मन में कई सवाल उठ रहे है कि जब सरकारे पर्यावरण सरंक्षण के नाम पर कार्यक्रम चला रही हैं, तो उन्हीं के अधिकारी इस तरह की हरकतें कैसे कर सकते हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जिला स्तरीय हरीयाली पर्व वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन सचिव राजस्थान सरकार व जिला कलेक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक,मुख्य कार्यकारी प्रशासनिक अधिकारीयों की मौजूदगी में किया गया एवं समुचे जिले में पर्यावरण सुरक्षा व संरक्षण हेतू एक पेड मॉ के नाम लगाने हेतू आमजन को संदेश दिया गया था। लेकिन वास्तविक रूप से देखा जाए तो जनता को जागरूक करने की जगह पहले इन अधिकारियों को जागरूक किया जाना चाहिए। आखिर उक्त हरे पेड की हत्या क्यू करवाई गई, प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना होगा। हरे पेड की कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों को सज़ा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में पर्यावरण को नुकसान पंहुचाने की इस तरह की हरकतें दोबारा न हों।इस मामले की जानकारी लेने के लिए पालिका कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी तेजराज भंडारी से पुछा गया तो उन्होने इस मामले की जानकारी नही होनपा बताकर संपर्क कट कर लिया। जबकि उपकलेक्टर रवि प्रकाश के स्वयं के मोबाईल पर दो मर्तबा संपर्क स्थापित किया मगर उन्होने रिसीव ही नही किया।प्रशासन के सामने खड़े हो रहे हैं कई सवाल- क्या वन विभाग से अनुमति ली गई थी, हरे पेड़ की कटाई के लिए वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। अगर अनुमति नहीं ली गई तो यह स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है।
प्रशासन इस सवाल का जवाब देने से बच क्यों रहा है ?।किसकी थी जिम्मेदारी ? –
नगर पालिका के किसी भी अधिकारी ने अब तक अपनी
जिम्मेदारी नहीं ली है। क्या इस कटाई के पीछे प्रशासन की मिलीभगत है, या फिर यह एक बड़ी लापरवाही का उदाहरण है ?।
कटाई की जरूरत क्यों पड़ी ? –

क्या पेड़ काटने का कोई वास्तविक कारण था, या फिर यह किसी व्यक्तिगत स्वार्थ या प्रभाव के चलते किया गया है। अथवा किसी कार्य योजना या विकास के नाम पर पर्यावरण की बलि दी जा रही है ?।
किसे होगा लाभ ? –
यह भी जांच का विषय है कि इस कटाई से किसे लाभ हुआ और इस हरे-भरे पेड़ को काटने की क्या मजबूरी रही है। प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना होगा और जिम्मेदार लोगों को सज़ा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में पर्यावरण को नुकसान पंहुचाने की पुर्नावति ना हो।
