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Home » ताजा खबर » किसी को फर्क नहीं पड़ता लेकिन किसी को दुकानदारी खत्म होने की घबराहट, नेम प्लेट विवाद का कांवड़ यात्रा रूट पर कितना असर
राज्य-शहर

किसी को फर्क नहीं पड़ता लेकिन किसी को दुकानदारी खत्म होने की घबराहट, नेम प्लेट विवाद का कांवड़ यात्रा रूट पर कितना असर

Rajasthan Darshan
Last updated: 2024/07/20 at 11:42 AM
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4 Min Read
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सावन के पवित्र महीने में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले यूपी सरकार के उस फरमान पर सियासी संग्राम छिड़ा है, जिसमें कांवड़ यात्रा रूट पर व्यापार चलाने वाले दुकानदारों, ढाबा मालिकों से उनका नाम बोर्ड पर लिखने को कहा है. संभल में सीएम योगी के आदेश लागू होने के बाद मुस्लिम दुकानदारों ने दुकान और फलों के ठेलों पर नेम प्लेट लगाते हुए इस पहला का स्वागत किया है. कांवड़ यात्रा के मद्देनजर आए इस आदेश पर कई मुस्लिम दुकानदारों को कोई एतराज नहीं है. उनका ये भी कहना है कि दुकान हिंदू की है, मुस्लिम की है या सिख और इसाई की, कांवरिया हो या कोई सामान्य ग्राहक, बेचने वाला कौन है ये जानना उनका अधिकार है. कुल मिलाकर बहुत से दुकानदारों को लगता है कि आदेश से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें अपनी दुकानदारी कम होने यानी बिजनेस में नुकसान होने का डर सता रहा है. मुजफ्फरनगर (muzaffarnagar), शामली, बागपत और मेरठ के साथ कांवड़ यात्रा के पूरे रूट (Kanwar Yatra Route name plate row) पर कैसी हैं हालात? आइए जानते हैं.

दुकानदारी घटने का डर तो है...

यूपी सरकार का वो आदेश जो कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानदारों, खासकर खाने-पीने का सामान बेचने वालों (भोजनालय/ ढाबा मालिकों) को उनका नाम प्रदर्शित करने के लिए बाध्य करता है, उसे लेकर यूपी के मुजफ्फरनगर लेकर उत्तराखंड के हरिद्वार तक पूरे कांवड़ यात्रा रूट में दुकानदारों की मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ दुकानदारों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, वहीं कुछ लोगों को अपनी सेल कम होने का डर सता रहा है.

सबसे बड़ी बहस

मुजफ्फरनगर की व्यस्त सड़कों से लेकर हरिद्वार तक आपको हजारों ऐसे फूड वेंडर्स, दुकानें और ढाबे मिल जाएंगे जहां चौबीसों घंटे योगी सरकार के उस आदेश की चर्चा हो रही है जिसमें उन्हें अपनी पहचान यानी नाम बताने को कहा गया है.

नेम प्लेट विवाद क्यों?

कुछ दुकानदारों से जब योगी सरकार के नेम प्लेट वाले फैसले पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा- ‘जब हम रमजान और ईद मनाते हैं तो हम खरीददारी करते समय कभी ये नहीं सोचते कि दुकानदार हिंदू है या मुसलमान. अब हमसे हमारी पहचान उजागर करने के लिए क्यों कहा जा रहा है? हो सकता है कि कई ग्राहक मेरी दुकान का नाम देखकर दूर हो जाएं.’

कहीं खुशी-कहीं गम

मुजफ्फरनगर, मेरठ और आगरा की बात करें तो फिलहाल इन जिलों पर आदेश का सबसे ज्यादा असर दिख रहा है. तीनों जगह व्यापारियों की मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही है. कोई खुश है तो कोई नेम प्लेट लगाने के आदेश से नाराज है.

आस्था का सवाल
एक अनुमान के मुताबिक करीब पांच करोड़ लोग कांवड़ यात्रा में जाते हैं, जिनमें से लगभग 2.5 करोड़ लोग यूपी से होकर गुजरते हैं. ऐसे में मुजफ्फरनगर से लेकर हरिद्वार के पूरे कांवड़ यात्रा रूट पर बहस का यही मुद्दा छाया हुआ है.
नाम बदलकर व्यापार करना क्या धोखा नहीं है?
रिपोर्ट्स के हवासे से एक केस स्टडी की बात करें तो टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक शामली-पानीपत रोड पर एक ढाबा है. जिसके मालिक हैं रिजवान चौधरी. रिजवान का कहना है कि भले वो मुस्लिम हैं लेकिन शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसते हैं. वो अपने यहां बनने वाले खाने में प्याज और लहसुन नहीं डलवाते फिर भी उन्हें ढाबा बंद करने के लिए कहा गया, जबकि वो अपने प्रतिष्ठान के बाहर बोर्ड पर अपना नाम लिखने के लिए तैयार थे. उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने उनकी बात नहीं मानी तो उनका बड़ा नुकसान हो जाएगा.
Rajasthan Darshan July 20, 2024 July 20, 2024
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