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Home » ताजा खबर » महाशिवरात्रि और आज का समाज
संपादकीय

महाशिवरात्रि और आज का समाज

Rajasthan Darshan
Last updated: 2026/02/15 at 2:28 PM
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2 Min Read
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महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, संयम और आंतरिक शक्ति का प्रतीक है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है, व्रत रखा जाता है और पूरी रात जागरण किया जाता है। शिव को ‘संहारक’ कहा जाता है, परंतु उनका संहार बुराइयों, अहंकार और अज्ञान का होता है।

आज के समाज में महाशिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ जाता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव, प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ ने मनुष्य को भीतर से अशांत कर दिया है। ऐसे समय में शिव का ‘ध्यानमग्न’ स्वरूप हमें शांति, धैर्य और संतुलन का संदेश देता है।

शिव का सादा वेश, जटाओं में बहती गंगा, गले में सर्प और शरीर पर भस्म—यह सब हमें सिखाता है कि बाहरी आडंबर से अधिक महत्वपूर्ण आंतरिक पवित्रता है। आज का समाज दिखावे और भौतिक सुखों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में शिव का सादगीपूर्ण जीवन हमें सरलता और संतोष का मार्ग दिखाता है।

महाशिवरात्रि का व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि बुरे विचारों और नकारात्मकता का त्याग भी है। यदि आज का समाज इस संदेश को अपनाए, तो हिंसा, ईर्ष्या और द्वेष जैसी समस्याएँ कम हो सकती हैं।

शिव का ‘नीलकंठ’ रूप हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में विष (कठिनाइयाँ) आएँ तो उन्हें धैर्य से सहन करना चाहिए और समाज की भलाई के लिए त्याग की भावना रखनी चाहिए।

अतः महाशिवरात्रि केवल मंदिरों में मनाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर झाँकने और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर है। यदि आज का समाज शिव के आदर्शों—सादगी, सहनशीलता, करुणा और आत्मसंयम—को अपनाए, तो हमारा जीवन और समाज दोनों अधिक शांत और समृद्ध बन सकते हैं।
डॉ. अभिलेखा परिहार
स्थान -हैदराबाद

Rajasthan Darshan February 15, 2026 February 15, 2026
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