अमित कुमार चेचानी
मेवाड़ विश्वविद्यालय के ख़िलाफ़ एबीवीपी ने उठाई आवाज*
*मेवाड़ विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री घोटाला मामले ने पकड़ा जोर*
*एबीवीपी ने की सख्त जांच और कार्रवाई की मांग*
चित्तौड़गढ़। जिले के गंगरार क्षेत्र में स्थित मेवाड़ विश्वविद्यालय में एक बार फिर विवादों से गिर गई है। विश्वविद्यालय पर फर्जी डिग्रियां बांटने और अवैध गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले को लेकर अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एबीवीपी ने अपना मोर्चा खोला है और उन्होंने सरकार से जांच की मांग की है साथ ही विश्वविद्यालय में चल रहे अन्य कोर्स और डिग्रियों की जांच की भी आवश्यकता जताई है।
एबीवीपी की जिला संयोजक अदिति कंवर भाटी ने कहा कि मेवाड़ विश्वविद्यालय लंबे समय से फर्जी डिग्री अवैध कोर्स और नियमों के उल्लंघन जैसे मामलों में चर्चित रही है । उन्होंने बताया कि इस विश्वविद्यालय में कहीं ऐसे छात्र हैं जिन्हें बिना क्लास अटेंड किये और बिना परीक्षा दिए ही डिग्री मिल गई है। कई बार नकली उपस्थिति रजिस्टर और फर्जी परीक्षा कॉपी का भी इस्तेमाल किया गया है।
*सरकार से पहले भी की गई थी मांग*
अदिति भाटी ने बताया कि एबीवीपी ने पहले भी राजस्थान सरकार से इस यूनिवर्सिटी की जांच की मांग की थी, लेकिन पूर्व सरकार ने इस गंभीर मुद्दे को नजर अंदाज किया अब जब हाल में राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री डॉ. करोड़ी लाल मीणा ने यूनिवर्सिटी का दौरा किया और वहां छापा मारा तब जाकर यह मामला फिर चर्चा में आया है।
*छापे में सामने आई गड़बड़ियां*
कृषि मंत्री के छापे के दौरान कहीं चौंकाने वाले तथ्य सामना आए जिसमें यूनिवर्सिटी में बिना डिग्री वाले शिक्षक पढ़ा रहे थे। फर्जी दस्तावेज और प्रमाण पत्र तैयार किये जा रहे थे। छात्रों से मोटी रकम लेकर उन्हे डिग्री दी जा रही थी। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि यह सब गतिविधियां खासकर गरीब और जनजातीय वर्ग के छात्रों के साथ हो रही थी जिबसे पैसे लेकर उन्हें गलत तरीके से पास किया जा रहा था।
*पूरे शिक्षा तंत्र के लिए खतरे की घंटी*
विद्यार्थी परिषद ने कहा कि यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी का मामला नहीं है बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र के लिए खतरे की घंटी है अगर ऐसी अनियमिताओं को रोका के नहीं गया तो हजारों छात्र का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं बल्कि समाज में गलत संदेश भी जाता है।
*जिला कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन*
इस मामले को लेकर एबीवीपी ने दिनांक 2 अगस्त शनिवार को चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की कि यूनिवर्सिटी में चल रहे हैं सभी कोर्स और डिग्रियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो एबीवीपी भविष्य में और बड़ा आंदोलन करेगी।
*शिक्षा मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से ले*
परिषद ने कहा कि दोषी लोगों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराया ना जा सके और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे। एबीवीपी ने यह भी मांग की कि शिक्षा मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से ले और पूरे राज्य में ऐसी यूनिवर्सिटी की समीक्षा करें।
*बड़ा सवाल ? फर्जी डिग्री कांड होने के बाद NAAC A ग्रेड कैसे हुआ विश्वविद्यालय*
कई सालों से हो रहे मेवाड़ यूनिवर्सिटी में फर्जीवाड़े मामलो के उजागर होने से पूरे राज्य ही नहीं पूरे देश को झकझोर दिया है। अब सभी की निगाहें सरकार पर टिकी है कि वह इस पर क्या कार्रवाई करती है। छात्रों और समाज के हित में इस मामले की सच्चाई उजागर करना और दोषियों को दंडित करना अत्यंत जरूरी हो गया है।
वहीं दूसरी ओर देखे तो पिछले साल फर्जी डिग्री सरकारी नौकरी लेने के मामले में एसओजी द्वारा जांच की गई थी और उसके यूनिवर्सिटी के कई पदाधिकारी गिरफ्तार भी किए गए थे और कुछ अंडरग्राउंड भी हो गए थे। जिन्होंने अनगिनत डिग्रियां पिछले कई सालों में बांटी थी, जिनकी संख्या उनको भी पता नहीं है। लेकिन वह मामला ठंडे बस्ते में चला गया और यूनिवर्सिटी और अनवरत रूप से चलती रही। वहीं NAAC द्वारा भी मेवाड़ यूनिवर्सिटी को ए ग्रेड दी गई है जो संदेह के घेरे में आती है।
अब सवाल यह उठता है कि फर्जी डिग्री मामले में राजस्थान की अन्य यूनिवर्सिटी को अवैध साबित करके बंद कर दिया गया है और उसके अध्यक्ष और कुलपति को भी गिरफ्तार किया गया था। जबकि मेवाड़ यूनिवर्सिटी को फर्जी डिग्री कांड होने के बाद भी NAAC द्वारा ए ग्रेड दिए जाने के बाद यहां पर कई नए कोर्स लागू होने की संभावनाएं बढ़ जाती है और मेवाड़ विश्वविद्यालय की अनियमितताओं को देखते हुए नए विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है।
