औंध जिला हॉस्पिटल में डायग्नोस्टिक सेंटर निष्क्रिय होने के कारण इमरजेंसी चिकित्सा और सर्जरी की आवश्यकता वाले सैकड़ों मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
यह सुविधा लगभग एक महीने से अधिक समय से बंद है, जिससे मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई के लिए दूसरों हॉस्पिटलों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है. मरीजों ने हॉस्पिटल प्रशासन को इस सुविधा को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का आग्रह किया है. हॉस्पिटल में सरकार की ओर से यूनिट स्थापित करने के लिए नई एजेंसी नियुक्त की गई है, जिसे 6 महीने की समय-सीमा दी गई है और उन्हें हॉस्पिटल में आए हुए 3 महीने बीत चुके हैं और नई एजेंसी के मुताबिक उन्हें डायग्नोस्टिक सेंटर शुरू करने में 3 महीने से अधिक समय लगेगा.
इमरजेंसी ट्रीटमेंट के लिए औंध हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई जांचों के लिए ससून हॉस्पिटल, वाईसीएम हॉस्पिटल या पिंपरी-चिंचवड़ मनपा द्वारा संचालित थेरगांव हॉस्पिटल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है और इन तीनों हॉस्पिटलों में स्क्रीनिंग सेंटरों पर पहले से ही भारी भीड़ और लंबी प्रतीक्षा सूची होती है, जिससे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. मरीजों के परिवारवालों ने व्यक्त की पीड़ा एक मरीज की बेटी ने बताया कि पिछले हफ्ते हम अपनी 84 वर्षीय माताजी जो ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित हैं, उन्हें औंध हॉस्पिटल लेकर आए थे. डॉक्टरों ने जांच कर उन्हें सीटी स्कैन और एमआरआई कराने को कहा था.
लेकिन हॉस्पिटल में डायग्नोस्टिक सेंटर अनुपलब्ध होने के कारण हमें मेरी माताजी को सीटी स्कैन और एमआरआई परीक्षण के लिए वाईसीएमएच ले जाना पड़ा. हम किसी तरह वहां पहुंच गए लेकिन वहां परीक्षण के लिए इंतजार कर रहे मरीजों की एक बड़ी कतार थी. 3 घंटे से ज्यादा इंतजार करने के बाद मेरी माताजी का सीटी स्कैन हुआ लेकिन एमआरआई के लिए हमें अगले दिन का अपॉइंटमेंट लेने के लिए कहा गया और वहीं वाईसीएमएच के डॉक्टरों ने सीटी स्कैन की रिपोर्ट लेने के लिए हमें 4 घंटे बाद बुलाया. एक अन्य मामले में, पेट में गांठ से पीड़ित 36 वर्षीय महिला के पति ने बताया कि मैं अपनी पत्नी को इलाज के लिए औंध हॉस्पिटल लेकर गया था और डॉक्टरों ने मेरी पत्नी को जल्द से जल्द एमआरआई कराने की सलाह दी थी.
लेकिन हॉस्पिटल में डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित न होने के कारण हमें बेहद तकलीफ हुई क्योंकि भारी धूप में मुझे मेरी पत्नी को एमआरआई जांच के लिए वाईसीएमएच ले जाना पड़ा और दुर्भाग्यपूर्ण वहां के सभी स्लॉट भरे हुए थे. जिसके चलते मुझे मेरी पत्नी को एमआरआई जांच के लिए थेरगांव हॉस्पिटल ले जाकर टेस्ट कराना पड़ा. प्रशासन को इस मुद्दे पर तीव्रता दिखानी चाहिए क्योंकि मेरी पत्नी जैसे सैकड़ों मरीज जो पहले ही तकलीफ से गुजर रहे हैं, इस असुविधा के कारण उनकी तकलीफ दोगुना हो जाती है.
