विश्व-संस्कृत-दिवस 09 अगस्त 2025
आचार्य रामकृष्णशास्त्री महामन्त्री विश्वसंस्कृतप्रतिष्ठान राजस्थान
विश्व संस्कृत दिवस, जिसे अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत दिवस और विश्व संस्कृत दिनम् के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो रक्षाबन्धन के उत्सव के साथ आता है। इस वर्ष संस्कृत दिवस शनिवार, 09 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन का मुख्य उद्देश्य भारत की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक संस्कृतभाषा के विषय में जागरूकता बढ़ाना और उसका प्रचार प्रसार करना है। संस्कृतभाषा का बहुत महत्व है क्योंकि यह साहित्य, दर्शन, गणित और विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में शास्त्रीय ग्रन्थों का आधार है।
संस्कृत दिवस को आधार बनाकर हम सभी संस्कृतभाषा और भारतीय संस्कृति के महत्व के विषय में जागरूकता बढ़ाएँ।
संस्कृत सीखने और प्रयोग को बढ़ावा देने वाली नीतियों और पहलों का समर्थन करें।
संस्कृत के विद्वानों, शिक्षकों और अभ्यासियों की उपलब्धियों और योगदान का उत्सव मनाएं और उन्हे प्रोत्साहित करें।
भावी पीढ़ियों तक संस्कृत ज्ञान और परम्पराओं के हस्तान्तरण को प्रोत्साहित करें।
विश्व संस्कृत दिवस का इतिहास १९६९ से प्रारम्भ होता है, जब भारत सरकार ने संस्कृत व्याकरणविद् महर्षि पाणिनि की २५०० वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में श्रावण पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में घोषित किया था।
महर्षि पाणिनि को पाणिनीय व्याकरण का जनक माना जाता है। उनकी रचना अष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण पर एक व्यापक ग्रन्थ है जिसकी आज भी प्रासाङ्गिकता विद्यमान है।
प्रथम संस्कृत दिवस १९६९ में मनाया गया था, जिसका विषय था “संस्कृत ज्ञान की भाषा।” यह कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित किया गया था और इसमें सम्पूर्ण विश्व से विद्वानों और गणमान्य लोगों ने भाग लिया था।
तब से निरन्तर विश्व संस्कृत दिवस हर वर्ष हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन सङ्गोष्ठी, व्याख्यान और संस्कृत से सम्बन्धित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं।
विश्व संस्कृत दिवस मनाने का उद्देश्य संस्कृत के महत्व के विषय में जागरूकता बढ़ाना तथा इसके अध्ययन और प्रयोग को बढ़ावा देना है।
संस्कृत दिवस संस्कृत की सुन्दरता और समृद्धि का उत्सव मनाने और विश्व में इसके महत्व की पुष्टि करने का दिन है। यह लोगों को संस्कृत सीखने और संस्कृतियों के बीच समझ और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इसका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने का दिन भी है।
२०१९ में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ( यूनेस्को ) ने श्रावण पूर्णिमा को अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत दिवस के रूप में घोषित किया। यह वैश्विक स्तर पर भाषा और इसके महत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम था।
संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसे कई आधुनिक भारतीय भाषाओं की जननी भी माना जाता है। यह एक समृद्ध और अभिव्यञ्जक, वैज्ञानिक भाषा है। जिसका इतिहास बहुत प्राचीन और समृद्ध है। संस्कृत भाषा साहित्य में विश्व का अतुलनीय ज्ञान भण्डार समाहित है।विश्व का सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद संस्कृत भाषा में ही निबद्ध है।
सम्पूर्ण विश्व में हमें लोगों को संस्कृत सीखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जिससे विश्व में विद्यमान विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञान, दर्शन और साहित्य पर संस्कृत भाषा का प्रभाव सहित विश्व में संस्कृत के योगदान को उजागर करना चाहिए।
शिक्षा और अनुसन्धान में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
संस्कृत को लोकभाषा के रूप में संरक्षित एवं सुरक्षित रखने के अथक प्रयत्न करते रहना चाहिए।
संस्कृत विज्ञान और दर्शन की भी भाषा है। भारतीय विज्ञान और दर्शन के कई महान कार्य संस्कृत में हुए है।
संस्कृत प्राचीन इण्डो-आर्यन भाषा को उन्नत और समृद्ध करती है जो अभी भी शास्त्रों और श्लोकों के माध्यम से फल-फूल रही है। यह विभिन्न विस्मृत हुई स्थानीय भाषाओं को पुनर्जीवित करने और क्रॉस-कल्चरल बॉन्ड को नवीनीकृत करने के लिए एक चिन्तनशील क्षण प्रदान करती है। विश्व संस्कृत दिवस के विशेष दिन पर जब विश्व में अनेक विद्वान् भाषाशास्त्री और बुद्धिजीवी विभिन्न राष्ट्रों में इस दिन विश्व संस्कृत दिवस के निमित्त एकत्रित होते हैं, तो यह सन्देश स्पष्ट रूप से गूञ्जता है – संस्कृत ज्ञान देती है और परम्पराओं को एक साथ लाती
है।
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