अभय कोठारी
हनुमंतनगर स्थित PGSR हॉल,’ मरुधर केसरी दरबार’ में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए साध्वी श्री धर्मप्रभा ने कहा कि मधुर वाणी मानव की संपत्ति है। वाणी की मिठास लोगों के हृदय को प्रेमपूर्ण बना देती है। व्यक्ति का लक्ष्य होना चाहिए कि इस खुशनुमा वातावरण में कटुता की दूषित हवा न फैले। मनुष्य की सारी दौड़-धूप सारी आपा धापी का एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि उसके कारण किसी की शांति भंग ना ही, उसकी वाणी से वातावरण कटु ना बने इसलिये व्यक्ति के वाणी, बोलने में सरसता मधुरता और विनम्रता होनी चाहिए। ताकि उसके जीवन में संतुलन बना रहे, हमारी वाणी की विनम्रता बरबस ही लोगों को अपना बनाकर हमें प्रेमपूर्ण सम्मान आदर दिलाती हैं। इंसान एक दुकान के समान हैं और जुबाने उस दुकाने का ताला है। जब ताला खुलता है तो पता चलता है कि दुकान सोने की है या कोयले की। मरुधर केसरी मिश्रीमल म.सा.,आचार्य सम्राट श्री आनंद ऋषि महाराज आदि अनेक महापुरुषों का स्मरण करते हुए साध्वी ने कहा कि उन महापुरुषों के वचनों में बड़ी शक्ति थी। उन्हें स्पर्श लब्धि और वचन लब्धि प्राप्त थी। यह महान आत्मायें वचन सिद्धि के धारक संत शिरोमाण महापुरुष थे। प्रारंभ में साध्वी स्नेह प्रभा ने वाणी के महत्व पर प्रभु महावीर की अंतिम देशना श्री उत्तराध्ययन सूत्र के माध्यम से बताया कि जैसे सड़े कान वाली कुत्तिया सब जगह से तिरस्कृत भगा दी जाती हैं वैसे हि कठोर कड़वें, कुत्सित बोलने वाला, अविनीत भी सब जगह से अनादर की प्राप्त करते हुए अपमानित किया जाता है। विवेक तीन प्रकार का होता है मन, वचन और काया का विवेक । यदि वचन का विवेक रखा जाए तो कभी – कभी बड़े नरसंहार टल सकते है व कई बार इन शब्दों के दुरुपयोग से बड़े-बड़े नरसंहार हो सकते हैं- महाभारत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जैसे कौआ कटु कर्कश वाणी से सबकी अप्रिय लगता है और वहीं कोयल भी रंग में कोओ के सदृश काली ही होती है, पर अपने मधुर आवाज़ से सबको अपना प्रिय बना लेती हैं। जहां मधुर वचनों के प्रयोग से पराया भी अपना बन जाता है, कटुतापूर्ण शब्द तिरस्कार को जन्म देता है। पहले हृदय में तोलकर फिर वचन बोलने चाहिए । शब्दों में बड़ी जान होती हैं. इनसे ही आरती,अरदास और अजान होती है। इस अवसर पर धर्मसभा में कोयम्बतूर से सुश्रावक माणकचन्द गादिया, चेन्नई से ललित श्रीश्रीमाल और अलसुर संघ के मंत्री अभय बांठिया आदि समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति तथा गुरुभक्तगण, श्रावक, श्राविकाओं ने धर्मसभा में उपस्थित रहकर साध्वीवृन्द के दर्शन वंदन एवं जिनवाणी प्रवचन श्रवण का लाभ लिया। अध्यक्ष गौतम चंद सिंघवी ने सबका स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन संघमंत्री सुरेश कुमार धोका ने किया
मधुर वाणी मानव की अनमोल संपत्ति साध्वी धर्मप्रभा
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