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Home » ताजा खबर » पश्चिम बंगाल में भाजपा आश्चर्यजनक रूप से टीएमसी पर बड़ी बढ़त हासिल कर रही है !
राज्य-शहर

पश्चिम बंगाल में भाजपा आश्चर्यजनक रूप से टीएमसी पर बड़ी बढ़त हासिल कर रही है !

Rajasthan Darshan
Last updated: 2024/03/31 at 4:21 PM
Rajasthan Darshan
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11 Min Read
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पश्चिम बंगाल में भाजपा आश्चर्यजनक रूप से टीएमसी पर बड़ी बढ़त हासिल कर रही है !
> अशोक भाटिया,

यह हम नहीं कह रहे है यह कहना हैं चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का । चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रसिद्धी पा चुके प्रशांत किशोर के विश्वेषणों पर आम तौर पर लोग बहुत भरोसा करते हैं। यह भरोसा उन्होंने यूं ही नहीं कमाया है। पिछले कई सालों में उन्होंने जो कहा वही हुआ है। अब ममता बनर्जी के चुनावी रणनीतिकार रह चुके प्रशांत किशोर ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा आश्चर्यजनक रूप से टीएमसी पर बड़ी बढ़त हासिल कर रही है। प्रशांत किशोर ने कहा, ‘मैं अनुमान लगा रहा हूँ कि भाजपा हर मायने में बंगाल में टीएमसी से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन कर रही है। लोकसभा चुनाव में बंगाल से चौंकाने वाले नतीजे देखने के लिए तैयार रहिए जो कि भाजपा के पक्ष में होंगे। जब मैं कहता हूँ कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव में बंगाल में सिंगल सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी तो कुछ लोग कह देते हैं- अरे तुम तो भाजपा के एजेंट हो इसलिए ऐसा कहते हो। अगर मैं ऐसा नहीं कहूँगा तो प्रोफेशनली मैं ईमानदार नहीं कहलाऊँगा।’
सवाल यह उठता है कि आखिर प्रशांत किशोर ये बातें किस आधार पर कह रहे हैं। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद बंगाल में भाजपा के लिए परिस्थितियां ठीक नहीं रही हैं। चाहे विधानसभा चुनाव हों या स्थानीय निकाय चुनाव सभी में भाजपा की दुर्गति हुई है। उपचुनावों में भी भाजपा को टीएमसी ने पस्त कर दिया। भाजपा के तमाम कद्दावर नेता ,मंत्री तक पार्टी छोड़कर टीएमसी शामिल हो चुके हैं। तो आखिर किशोर को उम्मीद की किरण कहां से दिख रही है? आइए देखते हैं कि क्यों प्रशांत किशोर की बातें सच हो सकती हैं ?

पश्चिमी बंगाल के चुनाव के इतिहास को देखे तो साल 2011 में 34 साल राज करने वाली वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली ममता बनर्जी 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की 42 में से 34 सीटें और फिर 2016 का विधानसभा चुनाव जीत कर राज्य में अपना सिक्का जमा चुकी थीं। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। 2024 के चुनाव में एनडीए के लिए 400 पार का लक्ष्य रखने वाली भाजपा क्या पश्चिम बंगाल में इस बार भी 2019 जैसी जीत हासिल कर पाएगी? ख़ासकर ऐसे में जब वहां संदेशखाली, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी जैसे बड़े मुद्दे हैं।
एक ओपिनियन पोल ने भाजपा को इस बार 25 सीटें दी हैं, एक दूसरे ने 19 जबकि एक अन्य ने 20 सीटें। मीडिया से बातचीत में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा कि बंगाल में भाजपा को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, जबकि टीएमसी नेता कुणाल घोष ने बातचीत में तृणमूल को 30-35 सीटें मिलने का दावा किया है।
इन सब दावों को साबित करने के अनेक कारण है । कहा जाता है कि पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा इतिहास रचने को तैयार थी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत आक्षेप भारी पड़ गया था।और अंतिम समय में बाजी पलट गई थी। ममता के लिए प्रधानमंत्री मोदी का कहा गया संबोधन दीदी ओ दीदी।। को टीएमसी ने मां -माटी और मानुष के अपमान का मामला बना दिया और देखते ही देखते भाजपा पर भारी पड़ गई टीएमसी। इस बार भाजपा ने रणनीति बदल दी है। ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत आक्षेप नहीं किया जा रहा है। हर बात के लिए टीएमसी को जिम्मेदार माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में ममता बनर्जी को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतते दिख रहे हैं। भाजपा के अन्य नेता भी ममता के खिलाफ अपमानजनक चुटकुले और संवेदनशील आरोप लगाने से बच रहे हैं।
अनंत राय राजबंशी समुदाय से आते हैं। मतुआ के बाद ये पश्चिम बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय है। अनंत राय को उम्मीदवार बनाने से भाजपा की उत्तरी बंगाल में अच्छी-खासी पकड़ बन गई है। क्योंकि वहां राजबंशी समुदाय का अच्छा-खासा दबदबा है।उत्तरी बंगाल की आठ में से चार लोकसभा सीटों पर राजबंशी ही जीतते रहे हैं। 2019 में भाजपा ने इनमें से सात सीटें जीती थीं।पार्टी को उम्मीद है कि इस बार आठों सीट भाजपा जीत सकेगी।

राज्य में इंडिया गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ रही टीएमसी अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा को मजबूत होने का एक और अवसर दे दिया है।ऐसा माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में इंडिया गठबंधन से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने के टीएमसी के फैसले के चलते टीएमसी विरोधी वोट भाजपा को मिलेंगे। इसके अलावा वोट बंटने का भी फायदा भाजपा को मिल सकता है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ टीएमसी के युसूफ पठान ताल ठोंक रहे हैं। पठान सेलेब्रेटी क्रिकेटर भी हैं और मुसलमान भी हैं। ऐसे में अगर वोट बंटता है तो किसका फायदा होगा।जाहिर है दोनों की लड़ाई में भाजपा अगर मजबूत कैंडिडेट उतारती है तो यहां से जीत भी सकती है।
सीएए बंगाल में भाजपा का चुनावी वादा रहा है। अमित शाह से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक ने बंगाल में सीएए लागू करने की बात करते रहे हैं । शायद यही कारण है कि भाजपा ने कानून को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। सीएए लागू होने का सबसे बड़ा फायदा बंगाल में मतुआ समुदाय को मिलेगा। मतुआ समुदाय के बारे में कहा जाता है कि मतुआ वोट जहां भी जाता है उसका पलड़ा भारी पड़ जाता है। बंगाल में लगभग एक करोड़ अस्सी लाख मतुआ समुदाय के मतदाता हैं, जो किसी भी दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं। पश्चिम बंगाल के नादिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों की कम से कम चार लोकसभा सीट में यह समुदाय निर्णायक है। मतुआ समुदाय की तरह राजवंशी समुदाय को भी सीएए का लाभ मिलने वाला है। राजवंशी भी हिंदू हैं। 1971 के बाद से इन लोगों को अब तक नागरिकता नहीं मिली है।इस तरह करीब 10 से 12 सीटों पर सीधे भाजपा बढ़त बनाती दिख रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में लगातार यात्राएं कर रहे हैं और संदेशखाली को लेकर जिस तरह हमलावर हैं उससे यही लगता है कि बंगाल में इस बार यह मुद्दा बड़ा बनने वाला है।स्थानीय भाजपा नेता संदेशखाली को उसी तरह ले रहे हैं जिस तरह कभी टीएमसी ने सिंगूर और नंदीग्राम को आंदोलन बना दिया था।संदेशखाली पर आंदोलन तेज़ करने की अपनी रणनीति के तहत ही पार्टी ने ‘द बिग रिवील-द संदेशखाली शॉकर’ शीर्षक से एक डॉक्यूमेंट्री भी जारी की थी। यह सभी जानते हैं कि नंदीग्राम में जबरन ज़मीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के सहारे ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए सत्ता में पहुंचने का रास्ता साफ़ हुआ था। नंदीग्राम से भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी कहते हैं कि संदेशखाली की परिस्थिति नंदीग्राम जैसी है। नंदीग्राम में लोगों ने ज़मीन के अधिग्रहण के ख़िलाफ़ लड़ाई की थी और यहां ज़मीन पर जबरन कब्ज़े के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं। संदेशखाली में खेती की ज़मीन पर जबरन कब्ज़ा यौन उत्पीड़न के बाद दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का विशेष महत्व रहा है,शायद यही कारण है कि सीप्रधानमंत्री से लेकर टीएमसी तक तुष्टीकरण की राजनीति करती रही है। भाजपा ने पहली बार राज्य में अलग तरह की राजनीति की है जिसके चलते पिछले चुनावों में हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है। राज्य की हिंदू आबादी कुल आबादी का लगभग 71% है। लोकसभा चुनाव 2019 में बड़ी संख्या में हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण हुआ। कई सर्वेक्षणों के अनुसार करीब 55% हिंदू वोट भाजपा के पक्ष में गए। शायद यही कारण है कि इस बार भाजपा भावनात्मक मुद्दे पर ही फोक्सड है। भाजपा सांसद और राज्य के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष कहना है कि राम मंदिर के मुद्दे ने पहले भी भाजपा को फायदा पहुंचाया है और इस बार भी यह पश्चिम बंगाल समेत देशभर के हिंदुओं को एकजुट करने में हमारी मदद करेगा। सीएए के चलते भी हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण और अधिक होने की उम्मीद है।

हिंदुओं में अनुसूचित जाति के राजबंशी, मतुआ और बाउड़ी, जो राज्य की जनसंख्या के करीब 23 फीसदी हैं इस बार और बड़े पैमाने पर भाजपा के पक्ष में वोट कर सकते हैं। 2019 में चाय श्रमिक और जंगलमहल के आदिवासी ने भी भाजपा को वोट दिए।उम्मीद की जा रही है कि सीएए के तहत मतुआ और राजवंशियों को होने वाले फायदे का भावनात्मक असर दूसरी अनुसूचित जातियों पर भी पड़ेगा । भाजपा के पक्ष में थोक के भाव में एससी वोट पड़ने की उम्मीद की जा रही है। अनंत महाराज को राज्यसभा भेजना,राजबंशी समुदाय के नेता और भाजपा के वर्तमान लोकसभा एमपी निशिथ प्रमाणिक को मंत्री बनाने आदि से इस वर्ग में भाजपा को लेकर अपनापन बढ़ा है ।

अशोक भाटिया,
वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार ,लेखक, समीक्षक एवं टिप्पणीकार
लेखक 5 दशक से लेखन कार्य से जुड़े हुए हैं
पत्रकारिता में वसई गौरव अवार्ड से सम्मानित,
वसई पूर्व – 401208 ( मुंबई )
फोन/ wats app 9221232130 E mail – vasairoad . yatrisangh@gmail.com

Rajasthan Darshan March 31, 2024 March 31, 2024
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