कोटा, 8 अक्टूबर 2026। विश्व दृष्टि दिवस पर गुरुवार को सुवि नेत्र चिकित्सालय के सभागार में आयोजित शैक्षणिक एवं जनजागरूकता कार्यक्रम में नियमित नेत्र परीक्षण, समय पर उपचार और मरणोपरांत नेत्रदान का संदेश दिया गया। ‘लव योर आईज’, अर्थात ‘अपनी आँखों से प्रेम कीजिए’ के आह्वान के साथ वक्ताओं ने नेत्र स्वास्थ्य को परिवार की प्राथमिकता बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर दृष्टिदोष एवं नेत्र रोगों के उपचार संबंधी जागरूकता पोस्टर का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन की कोटा शाखा, कोटा डिवीजनल ऑफ्थेलमिक सोसायटी तथा आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के कोटा चैप्टर ने सुवि नेत्र चिकित्सालय के सहयोग से किया। आयोजक संस्थाओं के पदाधिकारियों में आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के कोटा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. के. के. कंजोलिया एवं सचिव श्री सुरेश सेदवाल, इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन की कोटा शाखा के अध्यक्ष डॉ. दीपक गुप्ता एवं सचिव डॉ. अजीत धाकड़ तथा कोटा डिवीजनल ऑफ्थेलमिक सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. कमलेश केड़ावत एवं सचिव डॉ. राजेन्द्र चन्देल शामिल हैं। सुवि नेत्र चिकित्सालय की ओर से डॉ. सुरेश पाण्डेय, डॉ. विदुषी शर्मा, डॉ. सत्येन्द्र कुमार गुप्ता, डॉ. सुभाष गुप्ता एवं डॉ. निपुण बागरेचा कार्यक्रम से जुड़े रहे।
कार्यक्रम में डॉ. सुरेश पाण्डेय, डॉ. विदुषी शर्मा, डॉ. दीपक गुप्ता डॉ. अजीत धाकड़, डॉ. राजेन्द्र चन्देल, डॉ. अमित सिंह राठौड़, डॉ. संजय सोनी, सुश्री अनिता चौहान, श्री भुवनेश गुप्ता, डॉ. अशोक गुप्ता एवं श्री जी. डी. पटेल, डॉ सत्येन्द्र कुमार गुप्ता, डॉ. सुभाष गुप्ता एवं डॉ. निपुण बागरेचा , डॉ. कमलेश केड़ावत एवं सचिव डॉ. राजेन्द्र चन्देल ने व्याख्यान प्रस्तुत किए और अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि दृष्टि शिक्षा, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और जीवन की गरिमा का महत्वपूर्ण आधार है। बुजुर्गों की घटती दृष्टि को उम्र का सामान्य प्रभाव मानकर नहीं टालना चाहिए। मोतियाबिंद के पूरी तरह पकने की प्रतीक्षा करने के बजाय दृष्टि, दैनिक कामकाज और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार उपचार कराने का महत्व समझाया गया। काला पानी तथा मधुमेह से संबंधित आँखों के परदे के रोगों की समय पर पहचान के लिए नियमित जाँच पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम में बच्चों में बढ़ते निकट दृष्टिदोष और मोबाइल-कंप्यूटर के लगातार उपयोग से होने वाली आँखों की थकान एवं सूखेपन पर चर्चा हुई। बच्चों को प्रतिदिन बाहर खेलने, प्राकृतिक रोशनी में समय बिताने तथा पढ़ाई और स्क्रीन के उपयोग के बीच विराम लेने के लिए प्रेरित किया गया। हर 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड तक 20 फीट दूर देखने और नियमित रूप से पलकें झपकाने का संदेश दिया गया। समय से पहले जन्मे शिशुओं की आँखों के परदे की समयबद्ध जाँच का महत्व भी बताया गया।
नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाते हुए वक्ताओं ने बताया कि मरणोपरांत कॉर्निया दान किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का अवसर बन सकता है। परिवारों से नेत्रदान के विषय में संवाद करने और इस मानवीय संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया गया। आँख में चोट, अचानक दृष्टि घटने या संक्रमण होने पर घरेलू उपचार के बजाय शीघ्र नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में आँखों की देखभाल को जीवनभर की जिम्मेदारी बनाने तथा नेत्रदान के माध्यम से दूसरों के जीवन में उजाला फैलाने की अपील की गई।

