महिला अधिकारियों की प्रेरक कहानियों ने बढ़ाया उत्साह, शिक्षा, समानता और सामाजिक बदलाव का लिया संकल्प
सांतपुर (आबूरोड)। महिला सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सांतपुर में एक प्रेरणादायी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आईओसी अधिकारी भँवर चौहान ने महिलाओं एवं बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनने, अपनी प्रतिभा पहचानने तथा रूढ़िवादी कुरीतियों, अंधविश्वास और लैंगिक भेदभाव से ऊपर उठकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। विभिन्न विभागों में कार्यरत महिला अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम में श्रीमती योशिता कल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर महिला ही सशक्त परिवार तथा प्रगतिशील समाज की नींव है। महिलाओं की प्रतिभा का आकलन उनकी जाति, वर्ग, आर्थिक स्थिति अथवा रंग-रूप के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी योग्यता और क्षमता के आधार पर होना चाहिए। प्रत्येक महिला में कोई न कोई विशेष हुनर होता है, जिसे पहचानकर उचित अवसर प्रदान करना आवश्य है। श्रीमती योशिता कल्ला ने कहा कि बेटियों को बेटों के समान शिक्षा, सम्मान और अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बालिकाओं को अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा, कौशल विकास, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकती हैं। समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं की स्वतंत्रता, शिक्षा और विकास में बाधक रूढ़िवादी मान्यताओं को दूर किया जाए।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विभिन्न विभागों में कार्यरत महिला अधिकारियों के संघर्ष, परिश्रम और सफलता की प्रेरक कहानियाँ रहीं। भँवर चौहान ने उनके अनुभवों का उल्लेख करते हुए बालिकाओं को बताया कि सफलता केवल सपने देखने से नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, लक्ष्य के प्रति समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत बनाए रखने से प्राप्त होती है। महिला अधिकारियों की उपलब्धियों ने प्रतिभागियों को यह विश्वास दिलाया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से वे भी प्रशासन, चिकित्सा, कानून, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ सकती हैं।
नई पीढ़ी और माता-पिता के बीच संवाद जरूरी
भँवर चौहान ने बदलते सामाजिक परिवेश में माता-पिता और बच्चों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिवार में संवाद, आपसी विश्वास और सम्मान बनाए रखना जरूरी है। माता-पिता बच्चों की रुचियों और आकांक्षाओं को समझें, वहीं बच्चे भी अपने अभिभावकों के अनुभवों और मार्गदर्शन का सम्मान करें। आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक सोच अपनाते हुए पारिवारिक संस्कारों के साथ संतुलन बनाए रखना बेहतर भविष्य की आधारशिला है।
उन्होंने महिलाओं एवं बालिकाओं को अपने हुनर को निखारने, प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने तथा उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
महिला अधिकारियों का सम्मान, आत्मनिर्भरता का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान भँवर चौहान ने महिला अधिकारियों को उपहार भेंट कर उनके योगदान और सहभागिता के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उपस्थित महिलाओं एवं बालिकाओं ने शिक्षा को प्राथमिकता देने, अपने हुनर को पहचानने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर श्रीमती योशिता कल्ला, सीडीपीओ विभाग, श्रीमती आशा शर्मा, आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक, सुश्री दीपिका गर्ग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, श्री प्रफुल, मीडिया प्रभारी श्री रितिक सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महिला सशक्तिकरण केवल एक विचार नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की अनिवार्य आवश्यकता है। भँवर चौहान की इस पहल ने शिक्षा, समानता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ महिलाओं एवं बालिकाओं को अपने सपनों को साकार करने की नई प्रेरणा प्रदान की।
