कोटा। कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर के श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन जिनालय में विराग वर्धन पावन वर्षायोग-2026 के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर महाराज ने व्यसनमुक्ति, ब्रह्मचर्य और धर्ममय जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना भी जरूरी है, ताकि वे व्यसनों से दूर रहकर धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ सकें।
मुनिश्री ने कहा कि मिथ्यात्व, अविरति, कषाय और योग के कारण कर्मों का आस्रव होता रहता है। जीव का स्वभाव अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन और अनंत वीर्य है, लेकिन विषय-वासनाएं और पाप प्रवृत्तियां उसे आत्मकल्याण के मार्ग से दूर कर देती हैं। उन्होंने चारुदत्त के प्रसंग के माध्यम से समझाया कि कभी-कभी परिवार के सदस्य भी व्यक्ति को धर्ममार्ग से विचलित कर देते हैं। व्यसन और विषयासक्ति जीवन को बर्बाद कर सकते हैं। इसलिए बच्चों को पढ़ाई की उम्र से ही सही मार्गदर्शन देना चाहिए। धर्म के संस्कार व्यक्ति को पांच पापों से दूर रहने की प्रेरणा देते हैं और धार्मिक संतान ही माता-पिता की सच्चे अर्थों में सेवा कर सकती है।
मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा व पंकज खटोड ने बताया कि धर्मसभा का शुभारंभ श्रेष्ठी टीकमचंद पाटनी के पाद-प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अत्रमेश ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। अशोक जैन ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर मुनिश्री के समक्ष श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पित कर भक्ति भाव से दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।
धर्म के मार्ग से भटकाते हैं व्यसन, संयम से ही आत्मकल्याण संभव : मुनिश्री विवर्धन सागर
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