विराग वर्धन पावन वर्षायोग-2026 के अंतर्गत धर्मसभा में आत्मचिंतन, महाव्रत और गुरु आज्ञा पालन का संदेश
शिष्याएं बु. चाहत दीदी एवं सोनम दीदी की कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर में की गई गोद भराई
कोटा। कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर के श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन जिनालय में विराग वर्धन पावन वर्षायोग-2026 के अंतर्गत शनिवार को आयोजित धर्मसभा में गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर महाराज ने कहा कि अनादि काल से जीव जन्म-मरण के चक्र में भटक रहा है। संसार के इस भ्रमण से मुक्ति पाने के लिए बोधि की प्राप्ति, महाव्रतों का पालन और उत्कृष्ट समाधि की साधना आवश्यक है।
मुनिश्री ने जीव की संसार यात्रा का वर्णन करते हुए कहा कि निगोद से त्रस पर्याय प्राप्त करना अत्यंत दुर्लभ है। जीव अनंत काल से विभिन्न योनियों में जन्म-मरण करता आया है। पुण्य के संयोग से पंचेंद्रिय पर्याय प्राप्त होती है, लेकिन मनुष्य जीवन की सार्थकता आत्मबोध प्राप्त करने और मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने में है। उन्होंने कहा कि दीक्षा ग्रहण करने के बाद साधक को अपने लक्ष्य का सदैव स्मरण रखना चाहिए, गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिए और सांसारिक चकाचौंध से दूर रहकर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए।
मुनिश्री विश्वनायक सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक लक्ष्य बोधि प्राप्त करना है। आत्मचिंतन, संयम और साधना के माध्यम से ही जीव अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान सकता है।
धर्मसभा में बताया गया कि आचार्य श्री विभव सागर महाराज ने समाधिभक्ति की 600 श्लोकों में रचना की है। समाधि का भाव जीवन के अंतिम समय में भी आत्मस्वरूप में स्थिर रहना और समताभाव बनाए रखना है।
मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य श्री 108 विभव सागर महाराज की संघस्थ दो दीक्षार्थी शिष्याएं बु. चाहत दीदी एवं सोनम दीदी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए ऋद्धि-सिद्धि नगर जैन समाज की ओर से उनकी गोद भराई का धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाजजनों ने दोनों दीक्षार्थियों का भावपूर्ण अभिनंदन करते हुए उनके संयम और साधनामय जीवन की मंगलकामना की।
