देचू पंचायत देचू के सरपंच भवानी सिंह राठौड़ के सात वर्ष के कार्यकाल के पूर्ण होने के अवसर पर रावळी कोटड़ी, देचू में धन्यवाद सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संत-महात्माओं के पावन सान्निध्य के साथ जनप्रतिनिधियों, क्षेत्रवासियों, 36 कौम के सम्मानित बड़े-बुजुर्गों, युवा साथियों एवं मातृशक्ति सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में संत श्री रामविचार जी महाराज, संत प्रेमा राम जी महाराज एवं संत विष्णु भारती जी महाराज तथा पंडित तरुण जी सूरत का पावन सान्निध्य रहा। संत-महात्माओं के आशीर्वाद से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उपस्थित ग्रामीणों एवं अतिथियों ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।कार्यक्रम में संत श्री रामविचार जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि देचू सरपंच भवानी सिंह राठौड़ का सात वर्ष का कार्यकाल देचू के लिए बेहद स्वर्णिम काल रहा है। उन्होंने कहा कि एक युवा ने अपनी सोच, मेहनत और समर्पण के साथ देचू के विकास की नई इबारत लिखने का कार्य किया और देचू का मान-सम्मान राष्ट्रीय स्तर तक बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।संत श्री रामविचार जी महाराज ने कहा कि भवानी सिंह राठौड़ ने विकास को किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मुक्तिधाम से लेकर शिक्षा, सड़क, जनसेवा एवं सामाजिक सरोकारों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य किए। उन्होंने कहा कि युवा नेतृत्व में यदि सेवा और विकास की भावना हो तो ग्रामीण क्षेत्र भी नई पहचान बना सकता है। उन्होंने भवानी सिंह राठौड़ को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए देचू परिवार के प्रति उनके सेवा भाव की सराहना की।
भामाशाह कुंभ सिंह पातावत बोले—पद आते-जाते रहते हैं, सरपंच का रिश्ता पूरी उम्र चलता है
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भामाशाह कुंभ सिंह पातावत ने अपने संबोधन में कहा कि पद और जिम्मेदारियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन सरपंच का रिश्ता जनता के साथ पूरी जिंदगी चलता रहता है। उन्होंने कहा कि सरपंच का पद केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि गांव के लोगों के साथ जुड़ने और उनके सुख-दुख में साथ खड़े रहने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि सात वर्ष के कार्यकाल के दौरान भवानी सिंह राठौड़ का ग्रामीणों के साथ जो जुड़ाव रहा, वह आगे भी बना रहना चाहिए। उन्होंने देचू के विकास कार्यों तथा ग्रामीणों के साथ बनाए गए संबंधों का उल्लेख करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
जसवंत सिंह इंदा ने राजस्थान की संस्कृति और शिक्षा पर रखे विचार
जसवंत सिंह इंदा ने अपने संबोधन में राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं एवं शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। देचू सरपंच भवानी सिंह राठौड़ ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को आगे बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के स्थायी विकास के लिए सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा और संस्कारों को मजबूत करना आवश्यक है। देचू में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को उन्होंने क्षेत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भामाशाह कुंभ सिंह पातावत, जसवंत सिंह इंदा, ठा. किशन सिंह राठौड़ देचू एवं ठा. सुमेर सिंह रहे। इसके अलावा भगवान सिंह तेना, प्रभु सिंह बुड़किया, नाथु सिंह बापिणी, दान सिंह बुड़किया एवं हेमा राम कुमावत सहित अनेक गणमान्यजन कार्यक्रम में मौजूद रहे। क्षेत्र के विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
धन्यवाद सभा में देचू की 36 कौम के सम्मानित बड़े-बुजुर्गों, क्षेत्रवासियों, युवा साथियों एवं मातृशक्ति की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। सभा स्थल पर ग्रामीणों की मौजूदगी से कार्यक्रम में आत्मीय एवं पारिवारिक माहौल देखने को मिला।
इस अवसर पर भवानी सिंह राठौड़ ने सात वर्ष पूर्व निर्विरोध सरपंच चुने जाने से लेकर कार्यकाल के दौरान मिले स्नेह, प्रेम, सहयोग, विश्वास एवं मार्गदर्शन के लिए ग्रामवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सात वर्ष पूर्व जिस जनमानस ने विश्वास जताकर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी, आज कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर उसी जनमानस की उपस्थिति और स्नेह उनके लिए भावुक कर देने वाला क्षण रहा।
उन्होंने कहा कि सात वर्षों के दौरान बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद, मातृशक्ति के स्नेह, युवा साथियों के सहयोग तथा 36 कौम के विश्वास ने उन्हें निरंतर जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कार्यकाल पूरा होने को चला है, लेकिन देचू परिवार के साथ बने रिश्ते, अपनापन और सम्मान हमेशा कायम रहेगा।
सभा में सात वर्षों के दौरान ग्राम पंचायत से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों का भी उल्लेख किया गया। वार्ड संख्या 10 में लगभग 1.25 करोड़ रुपये के विकास कार्य, शिक्षा क्षेत्र में लगभग 43 लाख रुपये के कार्य तथा मुक्तिधाम में लगभग 41 लाख रुपये के विकास कार्यों की जानकारी साझा की गई। मुक्तिधाम में किए गए कार्यों तथा उसकी देखभाल के लिए जीवनपर्यंत संकल्प का भी उल्लेख हुआ।
इस दौरान ‘सरपंच आपके द्वार’ कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों के बीच पहुंचकर संवाद करने और उनकी समस्याओं को सुनने के प्रयासों की भी जानकारी दी गई। कार्यकाल के दौरान वेतन नहीं लेने तथा अलग-अलग अवसरों पर जरूरतमंदों की सहायता के लिए राशि उपयोग किए जाने की बात भी सभा में साझा की गई।
कार्यक्रम में भवानी सिंह राठौड़ के पिता स्वर्गीय ठाकुर श्री दुर्ग सिंह राठौड़ को भी याद किया गया, जिन्हें पूर्व में देचू की 36 कौम द्वारा निर्विरोध सरपंच चुना गया था। इसके बाद लगभग सात वर्ष पूर्व भवानी सिंह राठौड़ को भी निर्विरोध सरपंच चुना गया। पिता और पुत्र दोनों को निर्विरोध सरपंच चुने जाने के प्रसंग को कार्यक्रम में विशेष रूप से याद किया गया।
इसके बाद क्षेत्र के सरपंच साथियों द्वारा भवानी सिंह राठौड़ को निर्विरोध ब्लॉक अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे दायित्वों के लिए चुने जाने का भी उल्लेख किया गया।
कार्यक्रम के दौरान देचू ब्लॉक के सभी सरपंचों एवं पंचायत समिति सदस्यों का मान-सम्मान किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों के साथ सात वर्षों के दौरान रहे सहयोग एवं सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया गया। साथ ही क्षेत्र के पत्रकारों का भी सम्मान किया गया। पत्रकारों द्वारा क्षेत्र की गतिविधियों, ग्रामीण मुद्दों एवं विभिन्न कार्यक्रमों को समाचारों के माध्यम से सामने रखने के लिए उनका धन्यवाद किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित संत-महात्माओं, मुख्य अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, सरपंचों, पंचायत समिति सदस्यों, पत्रकारों, क्षेत्रवासियों, 36 कौम के बड़े-बुजुर्गों, युवा साथियों, मातृशक्ति एवं समस्त ग्रामवासियों के प्रति आयोजकों की ओर से हृदय से आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों का भी धन्यवाद किया गया।
सात वर्ष पूर्व निर्विरोध सरपंच चुने जाने से लेकर कार्यकाल पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस धन्यवाद सभा तक ग्रामवासियों का स्नेह, विश्वास और सहयोग कार्यक्रम की प्रमुख भावना रहा। संत-महात्माओं के आशीर्वाद, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता के बीच धन्यवाद सभा संपन्न हुई।
