निकाय विभाग की सेवाओं और योजनाओं की अपील के बहाने सुजस से दशहरे मेले के आमंत्रण का विज्ञापन कराया जारी
निंबाहेड़ा। नगर परिषद निंबाहेड़ा द्वारा आयोजित दशहरे मेले को लेकर इस बार मीडिया की अनदेखी की गई थी जिसके चलते मेले के लिए होने वाली प्रेस वार्ता भी नहीं बुलाई गई इससे मीडिया कर्मियों में नाराजगी देखी गई थी साथ ही कुछ ज्यादा प्रसार संख्या वाले समाचार पत्रों में दशहरा मेले के कार्यक्रमों की खबरों का व्यापक रूप से प्रकाशन नहीं हो रहा था। विश्वस्त्र सूत्रों से यह भी जानकारी मिली कि इन समाचार पत्रों को विज्ञापन रूपी सहयोग नहीं मिलने से इनसे जुड़े संवाददाताओं पर भी समाचारों को लेकर दबाव आ रहा था वही कुछ समाचार पत्र लगातार दशहरे मेले में हो रही अनियमितताओं को खबरों के मार्फत उजागर कर रहे हैं। कुछ मीडिया कर्मियों ने सोशल मीडिया पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी। समाचार पत्रों में मेले के कार्यक्रमों का गुणगान करने वाली खबरें नदारत व टेंडरों पारदर्शिता नहीं बरतने की खबरों का प्रकाशन होने से मेला आयोजको पर सवाल खड़े हो रहे थे संभवतया समाचार पत्रों की नाराजगी दूर करने के लिए नगर परिषद बोर्ड ने गली निकालते हुए निकाय विभाग की सेवा और योजनाओं की अपील के बहाने सुजस से दशहरे मेले के आमंत्रण का विज्ञापन 17 अक्टूबर को जारी कराया। जबकि सरकार के निर्देशानुसार स्थानीय स्तर के मेले आदि कार्यक्रमों का प्रचार प्रसार करने के लिए सजावटी विज्ञापन जारी नहीं कराया जा सकता तो फिर अपील के रूप में मेले के प्रचार प्रसार का विज्ञापन किस नियम एवं प्रस्ताव के जरिए किस अधिकारी की सहमति से लिया गया यह जांच का विषय है। बता दे की अपील में किसी अधिकृत अधिकारी के नाम का हवाला नहीं है सिर्फ सभापति एवं उपसभापति के नाम का उल्लेख है तो क्या सभापति एवं उपसभापति के पास इस प्रकार के सजावटी विज्ञापन जारी करने की शक्ति है यह भी विचारणीय बिंदु है। इस विज्ञापन में नगर निकाय विभाग की सेवाओं और योजनाओं का उल्लेख किया गया साथ ही मेले के कार्यक्रमों का विवरण भी दिया गया है जो मेले के प्रचार प्रसार की ओर इशारा करता है। बता दें कि मेला 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो गया था जो 20 अक्टूबर तक चलेगा ऐसी स्थिति में में 17 अक्टूबर को कुछ समाचार पत्रों में अपील के बहाने जारी कराया आमंत्रण विज्ञापन आमजन मैं अचरज पैदा कर रहा है। क्यूंकि विज्ञापन में सिर्फ 16 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक के कार्यक्रम प्रकाशित किए गए हैं इसको लेकर जन चर्चा यह है कि यह विज्ञापन मेला प्रारंभ होने से पहले प्रकाशित क्यों नहीं कराया। फिर जो भी हो नगर परिषद में अपनी मनमर्जी का यह पहला उदाहरण नहीं है इससे पहले भी कई मामलों में यहां पर नियमों की अनदेखी कर मनमर्जी ही चल रही है।
उपरोक्त मामले में एक बात और सामने आई जो यह है कि नगर के एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ने कुछ गणमान्य लोगों की उपस्थिति में यह तर्क दिया था कि यदि समाचार पत्रों में खबरें नहीं छपेगी तो क्या मेल नहीं होगा ? जबकि यह विज्ञापन जारी कराने में भी उन्हीं का योगदान है तो फिर सोचने वाली बात यह है कि खबरों के लिए दिए गए तर्क के उलट विज्ञापन जारी करवाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
